गिलोय की चटनी Giloy ki chatney

गिलोय की चटनी Giloy ki chatney

 गिलोय बुखार के लिए रामबाण औषधि है। इसे जीवंतिका, अमृता के नाम से भी जाना जाता है। इसका उपयोग डेंगू बुखार, मलेरिया, चिकनगुनिया रोगों से बचने के लिए किया जाता है। यह पुराने बुखार को ठीक करता है। इसकी पत्तियां और तने को पीसकर उपयोग में लाया जाता है, या काढ़ा बनाकर उपयोग में लेते हैं। इस की तासीर गर्म होती है। गिलोय के रस को 20 से 30 मिली ग्राम तक का ही उपयोग करना चाहिए। यह मधुमेह रोगियों के लिए लाभदायक होता है। इसका उपयोग चिकित्सक की सलाह से ही किया जाना चाहिए। यह रक्त में शर्करा की मात्रा को बहुत कम कर देता है। जिससे अन्य समस्या हो सकती हैं। गिलोय पाचन तंत्र को ठीक रखता है। अतिसार और दस्त में यह फायदा करता है। गैस बदहजमी जलन पेट से संबंधित रोग गिलोय से ठीक होते हैं। पर किसी किसी को गिलोय से कब्ज हो जाता है। अतः चिकित्सक की सलाह पर इसका सेवन करना चाहिए। गिलोय रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है।





गिलोय को घर पर उपयोग करने के लिए इसका काढ़ा बनाकर उपयोग किया जाता है। काढ़ा के अलावा गिलोय की चटनी बनाकर इसे उपयोग में लाया जाता है। गिलोय की चटनी का उपयोग बहुत कम मात्रा में की जानी चाहिए।




सामग्री

गिलोय की पत्ती 2 से 3 या गिलोय का तना 1 इंच का टुकड़ा, टुकड़े को कुचल लेंगे

टमाटर 1

 काली मिर्च 4 से 5 दाना

 धनिया पत्ती स्वाद के लिए कटी हुई 2 चम्मच

 नमक स्वादानुसार

 गुड कुटी हुई 1 चम्मच









विधि

गिलोय की ताजा पत्तियां या गिलोय का तना लेंगे तने के टुकड़े को पहले कुचल लेंगे। तने के टुकड़े को साफ पानी में धोकर लेंगे। उसके साथ टमाटर, काली मिर्ची, धनिया पत्ती मिलाकर मिक्सी में पीस लेंगे। नमक स्वाद के अनुसार मिलाएंगे, यह चटनी स्वाद में थोड़ी थोड़ी कड़वी होती है। इसलिए इसमें गुड मिला लेंगे। इस तरह पीसकर चटनी तैयार हो जाएगी। इसे भोजन के साथ चटनी के रूप में एक चम्मच ले सकते हैं, अल्प मात्रा में लेना है। 

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